रामपुरा।* राष्ट्रीय भील सेना के बैनर तले गुरुवार को आदिवासी समाज ने जयस के साथियों के साथ तहसील कार्यालय पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। ज्ञापन में आदिवासी समाज की 5 प्रमुख मांगें रखी गईं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संविधान में मिले अधिकारों के बावजूद आदिवासी समाज आज भी उपेक्षा का शिकार है।
आदिवासी नेताओं ने मांग की कि देशभर की जेलों में बंद आदिवासी बंदियों को अनुच्छेद 72 के तहत माफी देकर रिहा किया जाए। 9 अगस्त “विश्व आदिवासी दिवस” पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित हो। साथ ही “नर्मदा-पावागढ़ भील प्रदेश पेयजल परियोजना” को राष्ट्रीय दर्जा देकर 12 आदिवासी जिलों में पानी पहुंचाया जाए। इसके अलावा अरावली-विंध्य में हर्बल पार्क और भील प्रदेश की नदियों में आदिवासियों के लिए जल आरक्षण कानून बनाने की भी मांग की गई। चेतावनी दी गई कि मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन होगा।
आदिवासी समाज की 5 बड़ी मांगें*
1.रिहाई:* अनुच्छेद 72 के तहत जेल में बंद आदिवासियों को माफी
- अवकाश: 9 अगस्त को “विश्व आदिवासी दिवस” पर राष्ट्रीय अवकाश
- पेयजल: नर्मदा से पावागढ़ होते हुए 12 जिलों तक पेयजल परियोजना
- पर्यावरण: हर पंचायत की पहाड़ी पर हर्बल पार्क, वृक्षारोपण
- अधिकार: भील प्रदेश की नदियों में आदिवासियों के लिए जल आरक्षण कानून









