“मनासा। ग्रामीण क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में महिला आरक्षण के उद्देश्य पर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि निर्वाचित महिला सरपंचों के स्थान पर उनके पति, पुत्र या अन्य परिजन पंचायत का संचालन कर रहे हैं। इससे पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होने के साथ-साथ शासन की मंशा भी कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।ग्रामीणों का कहना है कि कई पंचायतों में महिला सरपंच केवल नाममात्र की जनप्रतिनिधि बनकर रह गई हैं, जबकि पंचायत के अधिकांश प्रशासनिक और विकास कार्य उनके परिजनों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह पंचायती राज व्यवस्था की भावना के विपरीत है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।वहीं, स्वच्छता अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए गए मिनी ट्रैक्टर एवं कचरा संग्रहण वाहनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर इन संसाधनों का नियमित उपयोग नहीं हो रहा है, जिससे गांवों की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यदि ऐसा है, तो संबंधित वाहनों के उपयोग और रखरखाव की भी जांच की जानी चाहिए।ग्रामीणों ने जिला एवं जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि कहीं निर्वाचित महिला सरपंचों के अधिकारों का हनन हो रहा है या सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि पंचायत का संचालन स्वयं निर्वाचित महिला सरपंच ही करें, ताकि महिलाओं को मिले संवैधानिक अधिकारों का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके और ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।
ब्यूरो रिपोर्ट,,, दशरथ माली चचोर












