रामपुरा। सरकार द्वारा गरीब एवं पात्र परिवारों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की व्यवस्था रामपुरा तहसील के गांधी सागर बैक वाटर एरिया से सटे हुए ग्राम पंचायतो मे समूह के अंतर्गत बनी हुई छोटी-छोटी दुकाने जोकि सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। क्षेत्र के कई हितग्राहियों का आरोप है कि स्वयं सहायता समूहों के नाम पर संचालित कई राशन दुकानों का संचालन नियमों के विपरीत महिलाओं के बजाय पुरुष कर रहे हैं। साथ ही राशन वितरण में अनियमितता, मनमानी और हितग्राहियों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में कई बार सोशल मीडिया, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में यह चर्चा है कि आखिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि कई पात्र परिवारों को समय पर पूरा राशन नहीं मिल पाता, जिससे सरकार की जनकल्याणकारी योजना का लाभ प्रभावित हो रहा है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि जिन दुकानों का संचालन महिलाओं के नाम पर है, वहां वास्तविक संचालन कौन कर रहा है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रामपुरा तहसील की सभी पीडीएस दुकानों का रिकॉर्ड एवं वितरण प्रणाली की व्यापक जांच कराई जाए, ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके तथा गरीबों के हक पर किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगाई जा सके।2026 के शुरुआती मार्च महीने में गेहूं चावल वितरण के बाद जुलाई माह तक सही तरीके से गेहूं वितरण नहीं हो पाए सिर्फ कागजों और ओटीपी के माध्यम से दर्शाये जा रहे वितरण आमजन की पुकार भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो और न्याय मिले अबकी बार,,,,
ब्यूरो रिपोर्ट,,, दशरथ माली चचोर










