मनासा/रामपुरा (नीमच)। मनासा जनपद के अंतर्गत आने वाली रामपुरा तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया और ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि अप्रैल माह का राशन कई पात्र हितग्राहियों को नहीं मिला, जबकि बाद में जून-जुलाई माह का राशन एक साथ वितरित किया गया। आरोप है कि इस वितरण में भी भारी अनियमितताएं हुईं और करीब कई प्रतिशत पात्र हितग्राही अपने हक के राशन से वंचित रह गए।ग्रामीणों के अनुसार शासकीय उचित मूल्य की कई दुकानें संदेह के घेरे में हैं। विशेष रूप से , अरनिया ढाणी, राजपुरा, बंदडा,कराड़िया, पालड़ा की राशन दुकानों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कई दुकानों पर महिलाओं के नाम से संचालन दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविक संचालन उनके परिजनों द्वारा किया जाता है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं गांव-गांव और घर-घर जाकर स्टिंग शैली में सत्यापन एवं जांच करें, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उनका दावा है कि ऐसी निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस गांव में कितने पात्र हितग्राहियों को राशन मिला, कौन वंचित रहा और कहां-कहां अनियमितताएं हुईं। इससे “दूध का दूध और पानी का पानी” जनता के सामने आ जाएगा।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गरीबों के हिस्से का राशन आखिर कहां जा रहा है? शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? भ्रष्टाचार पर लगाम कब लगेगी और पात्र हितग्राहियों को उनका पूरा हक कब मिलेगा?ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खाद्य विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए तथा जिन हितग्राहियों को राशन नहीं मिला है, उन्हें तत्काल उनका पूरा राशन उपलब्ध कराया जाए।नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और प्राप्त शिकायतों पर आधारित है। आरोपों की निष्पक्ष जांच एवं आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
ब्यूरो रिपोर्ट,, दशरथ माली









