दशरथ मालीचीताखेड़ा-
1 जून। सत्ताधारी नेताओं की स्वार्थ की राजनीति और संबंधित विभाग के आलाअफसरों की लापरवाही के चलते धामनिया चीताखेड़ा जीरन मार्ग बना दुर्घटना मार्ग।आए दिन वाहन चालक दुर्घटना का शिकार होकर हो रहे हैं लहूलुहान,किसी को नहीं आ रहा है रहम।जिला मुख्यालय को चीताखेड़ा और झाझरवाड़ा इंडस्ट्रीज एरिया से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पिछले दो वर्षों से पूरी तरह छलनी होकर गड्ढों में तब्दील हो चुका है। बदहाली का आलम यह है कि अब इस रास्ते पर संबंधित विभाग के नुमाइंदे भी सुरक्षित नहीं हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग में ही कार्यरत कर्मचारी भी बना हादसे का शिकार, हुए बुरी तरह लहूलुहान। इस मार्ग पर सैकड़ों वाहन चालक ऐसे हादसे में लहूलुहान हो चुके हैं और अब यह आम बात हो चुकी हैं।
कलेक्टर के आदेश को भी निचले स्तर के अफसर पांव की पेंजनिया बनाकर चीडा रहे हैं
यह मार्ग झाझरवाड़ा इंडस्ट्रीज एरिया को जिला मुख्यालय से जोड़ता है। भारी वाहनों के दबाव और ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए स्थानीय विधायक के प्रयासों से इसे मेगा हाईवे की मंजूरी मिली थी। झाझरवाड़ा से मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ तहसील तक के इस प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन विडंबना देखिए कि पिछले 4 महीनों से इसकी फाइल शासन स्तर पर धूल फांक रही है।
कलेक्टर डॉ. हिमांशु चंद्रा ने इस जर्जर मार्ग को सुधारने के लिए संबंधित विभाग को दो बार कड़े निर्देश दिए, लेकिन निचले स्तर के लापरवाह अफसरों ने उसी आदेश को पांव की पेंजनिया बनाकर चिड़ाना शुरू कर दिया है। सड़क का डामर पूरी तरह उखड़ चुका है और शोल्डर गायब होने से सड़क किनारे जानलेवा खाई बन चुकी है।
अखबारी भभकी और नेताओं की गुप्त बीमारी सिर्फ फोटो खिंचवाने की मची है होड़
सड़क की दुर्दशा पर अब राजनीति भी गरमाई हुई है, लेकिन धरातल पर सब शून्य है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष तरुण बाहेती के बाद अब एक और सफेदपोश नेता अपनी पुरानी आदत के अनुसार आंदोलन की कोरी भभकी देते नजर आ रहे हैं।
असल में, इन विपक्षी नेताओं की नेतागिरी सिर्फ अखबारों और सोशल मीडिया की सुर्खियों तक ही सिमट कर रह गई है। इन्हें केवल मीडिया में नाम और फोटो छपवाने की गुप्त बीमारी लगी हुई है। 5 महीने पहले जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने महुडिया गांव में चक्काजाम करने का उतावलापन दिखाया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इसके बाद एक और नेता ने पीडब्ल्यूडी कार्यालय पर ताला लगाने की बात कही थी, वो भी फुस्स साबित हुई। अब इन्हें देख एक और बड़बोले नेता मैदान में आए हैं, पाकिस्तान की तरह भभकी देने कूदे हैं। चर्चा तो यहाँ तक है कि अखबारों में नाम चमकाने के लिए खबरों के नाम से पैसा खर्च करने में भी गुरेज नहीं करते, लेकिन जनता के हक के लिए जमीन पर उतरने का दम किसी में नहीं है।
जिम्मेदारों का क्या है कहना?
भुगतभोगी पीडब्ल्यूडी कर्मचारी का दर्द–
मैं रविवार सुबह नीमच से अपने घर चीताखेड़ा लौट रहा था। पूरी सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। अचानक बाइक एक गहरे गड्ढे में धंस गई और मैं दूर जा गिरा। मेरे हाथ और पैर में काफी चोट आई है। जब हम ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा?
— रामरतन जाटव, घायल पीडब्ल्यूडी कर्मचारी, चीताखेड़ा।—
अधिकारी का तर्क डामर नहीं है, डस्ट (धूल) से भरेंगे गड्ढे!—
*खबर मिलने के बाद मार्ग का निरीक्षण किया गया है। सड़क के शोल्डर काफी गहरे हो गए हैं और डामर उखड़ चुका है। फिलहाल डामर उपलब्ध नहीं होने के कारण गड्ढों और शोल्डर्स को डस्ट (धूल-मिट्टी) से भरकर वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। मेगा हाईवे की फाइल पिछले 4 माह से शासन स्तर पर लंबित है, वहां से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
— *एसडीओ नेहा राठौर, पीडब्ल्यूडी विभाग, नीमच*-








