“नीमच जिले के रामपुरा में मिली दुर्लभ जंपिंग स्पाइडर Chrysilla volupe, जैव-विविधता अध्ययन में महत्वपूर्ण उपलब्धि”

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मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रामपुरा क्षेत्र से दुर्लभ जंपिंग स्पाइडर Chrysilla volupe (Karsch, 1879) का पहला फोटोग्राफिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। मध्य प्रदेश में पहली बार इस मकड़ी को रिपोर्ट किया गया है। यह खोज क्षेत्र में पायी जाने वाली मकड़ियों की प्रजातीय विविधता एवं राज्य की समृद्ध जैव विविधता को और अधिक प्रमाणित करती है।
Chrysilla volupe परिवार Salticidae (जंपिंग स्पाइडर) की एक आकर्षक प्रजाति है, जो अपने चमकीले और इंद्रधनुषी रंगों के कारण आसानी से पहचानी जाती है। नर मकड़ी के शरीर पर लाल, नारंगी, नीले तथा सुनहरे रंगों की धात्विक चमक दिखाई देती है, जो इसे विश्व की सबसे सुंदर जंपिंग स्पाइडर प्रजातियों में शामिल करती है।
हाल ही में रामपुरा क्षेत्र में एक फील्ड सर्वेक्षण के दौरान शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामपुरा के डॉ. लखन कुमार यादव ने इस दुर्लभ प्रजाति की मकड़ी को देखा और उसका फोटोग्राफिक दस्तावेजीकरण किया। मकड़ी की पहचान तथा उसके टैक्सोनोमिक वर्गीकरण में फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (FES) के श्री मनोहर पवार ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों द्वारा पुष्टि के बाद यह रिकॉर्ड क्षेत्र से Chrysilla volupe का पहला फोटोग्राफिक रिकॉर्ड माना गया। इसे “मुनिस एंटोमोलॉजी एंड जूलॉजी” नामक साइंटिफिक पत्रिका ने प्रकाशित किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे रिकॉर्ड किसी क्षेत्र में प्रजातियों के वितरण, आवासीय प्राथमिकताओं तथा संरक्षण आवश्यकताओं को समझने में सहायक होते हैं। यह खोज दर्शाती है कि रामपुरा एवं आसपास के क्षेत्र सूक्ष्म जीव-जंतुओं की समृद्ध जैव विविधता को संजोए हुए हैं।
इस प्रजाति का ऐतिहासिक महत्व भी अत्यंत रोचक है। इसे पहली बार वर्ष 1879 में जर्मन अरैक्नोलॉजिस्ट फर्डिनेंड कार्श द्वारा वर्णित किया गया था। इसके बाद लगभग 150 वर्षों तक इस प्रजाति का कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड सामने नहीं आया, जिसके कारण इसे विलुप्त अथवा अत्यंत दुर्लभ माना जाने लगा। वर्ष 2018 में केरल के वायनाड वन्यजीव अभयारण्य में शोधकर्ताओं द्वारा इस मकड़ी को पुनः खोजा गया, जिसने वैज्ञानिक जगत का ध्यान आकर्षित किया।
भारत में अब तक Chrysilla volupe के रिकॉर्ड गुजरात, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तथा पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से प्राप्त हो चुके हैं। हाल के वर्षों में महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्र से भी इसका रिकॉर्ड प्रकाशित किया गया है। रामपुरा (नीमच) से प्राप्त यह फोटोग्राफिक रिकॉर्ड मध्य प्रदेश में इस प्रजाति की उपस्थिति के प्रमाण के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों एवं प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि यदि ऐसे क्षेत्रों में नियमित सर्वेक्षण और अध्ययन किए जाएं तो भविष्य में अनेक नई अथवा दुर्लभ प्रजातियों के रिकॉर्ड सामने आ सकते हैं। यह उपलब्धि न केवल नीमच जिले बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की जैव विविधता संबंधी जानकारी में महत्वपूर्ण योगदान है।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस खोज का स्वागत करते हुए कहा है कि मकड़ियों तथा अन्य अकशेरुकी जीवों पर शोध और दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि राज्य की वास्तविक जैव विविधता का व्यापक आकलन किया जा सके।

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अजीमुल्ला खान, नीमच जिले के रामपुरा तहसील के छोटी खंडार गाँव के मूल निवासी हैं। 15 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ दे रहे अजीमुल्ला खान स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता देते हैं। स्थायी पता: छोटी खंडार, रामपुरा, जिला - नीमच (मध्य प्रदेश) पत्रकारिता अनुभव: 15 वर्ष ब्लड ग्रुप: A+ (ए पॉजिटिव) संपर्क: 9179319989

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