मनासा और रामपुरा क्षेत्र में इन दिनों निजी वाहनों पर अवैध हूटर और सायरन लगाने का चलन तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ छुटभैया नेता और खुद को पत्रकार बताने वाले लोग अपनी निजी गाड़ियों में हूटर लगाकर सड़कों पर रौब दिखा रहे हैं। इससे न केवल यातायात नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों के मुताबिक, बाजार और मुख्य मार्गों पर कई निजी वाहन हूटर बजाते हुए निकलते हैं, जिससे राहगीर और अन्य वाहन चालक भ्रमित हो जाते हैं। कई बार ऐसे वाहन ट्रैफिक जाम से बचने और पहले निकलने के लिए भी हूटर का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं।
नियम स्पष्ट हैं कि हूटर और सायरन का उपयोग केवल अधिकृत आपातकालीन सेवाओं—जैसे एम्बुलेंस, पुलिस और फायर ब्रिगेड—के वाहनों तक सीमित है। निजी वाहनों पर इनका उपयोग नियमों के विरुद्ध है। सर्वोच्च न्यायालय भी वीआईपी संस्कृति पर रोक लगाने और अनधिकृत वाहनों पर सायरन-हूटर के इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपना चुका है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियम स्पष्ट हैं, तब निजी वाहनों में लगे ये हूटर आखिर किसकी अनुमति से चल रहे हैं? यदि अनुमति नहीं है तो संबंधित विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया? क्या प्रभावशाली लोगों के कारण नियमों की अनदेखी की जा रही है?
क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन और यातायात पुलिस से विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की जांच करने, अवैध हूटर हटवाने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि कानून का सम्मान तभी होगा, जब उसका पालन बिना किसी भेदभाव के सभी पर समान रूप से लागू किया जाएगा।
जनता का सवाल
निजी वाहनों पर हूटर लगाने की अनुमति किसने दी?
क्या यातायात विभाग को ऐसे वाहनों की जानकारी नहीं है?
नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह अवैध हूटर संस्कृति पर कब प्रभावी कार्रवाई करता है और सड़कों पर कानून का समान पालन सुनिश्चित करता है।
मनासा-रामपुरा में बढ़ी ‘फर्जी वीआईपी’ बनने की होड़: निजी गाड़ियों पर हूटर-सायरन, नियमों को खुली चुनौती
By starhindinewslive@gmail.com
Published On:









