मनासा। मनासा विधानसभा क्षेत्र के बरखेड़ा-बरखेड़ी गांव के समीप मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। गांव बनी स्थित गैलेक्सी पब्लिक कॉन्वेंट स्कूल की बस सड़क किनारे गहरी खाई में उतरकर झुक गई। बस में उस समय 9 मासूम स्कूली बच्चे सवार थे। बस के अचानक खाई में उतरते ही बच्चों में चीख-पुकार मच गई। आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और साहस का परिचय देते हुए एक-एक कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।हादसे में दो-तीन बच्चों को मामूली चोटें आईं, जबकि किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं पहुंची। हालांकि, जिस तरह बस खाई में फंसकर झुक गई थी, यदि वह पूरी तरह पलट जाती तो बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता था।यह घटना एक बार फिर जिले में संचालित निजी स्कूल बसों की फिटनेस, सुरक्षा मानकों और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि कई स्कूलों की बसें बिना पर्याप्त निगरानी और नियमित जांच के सड़कों पर दौड़ रही हैं।अभिभावकों में नाराजगी, चालक को हटाया गयाघटना के बाद कई अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने संबंधित बस चालक को तत्काल हटा दिया। हालांकि पुलिस में किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।प्रत्यक्षदर्शियों ने बचाई मासूमों की जानप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस सड़क से नीचे उतरकर गहरी खाई में फंस गई थी। बच्चों की चीख-पुकार सुनते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बिना देर किए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।प्रबंधन का पक्षविद्यालय संचालक का कहना है कि बस पलटी नहीं थी, बल्कि सड़क किनारे बनी खाई में उतरकर झुक गई थी। सभी बच्चे सुरक्षित हैं और विद्यालय का संचालन शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा है।बड़ा सवालकुछ समय पहले भी इसी क्षेत्र में सड़क सुरक्षा से जुड़ी एक दुखद घटना सामने आई थी। ऐसे में लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद यदि स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता।ग्राउंड रिपोर्टयह घटना केवल एक बस दुर्घटना नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चेतावनी है। स्कूल बसों की नियमित फिटनेस जांच, अनुभवी चालकों की नियुक्ति, सड़क सुरक्षा मानकों का पालन और प्रशासन की प्रभावी निगरानी समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। यदि जिम्मेदार विभाग अब भी नहीं चेते, तो अगली बार किस्मत नहीं, बल्कि लापरवाही की कीमत मासूमों को चुकानी पड़ सकती है।
ब्यूरो रिपोर्ट,, दशरथ माली चचोर

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