नीमच (समरथ सेन)
27 मई 2026
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत आयोजित शिविर में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जीरन में बिना जांच किए ही मनमाने तरीके से रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में दो लैब टेक्नीशियनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने स्पष्ट किया है कि, “गर्भस्थ शिशु और माता की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
🚨 क्या है पूरा मामला?
गत 25 मई 2026 को सीएचसी जीरन में प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के अंतर्गत एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया था। इस दौरान पालसोड़ा निवासी गर्भवती महिला श्रीमती रीना राठौर के पति श्री अनिल राठौर ने लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के अनुसार, लैब टेक्नीशियन श्री अंकित शर्मा और सुश्री लीना सिंघाड़िया द्वारा यूरिन, ब्लड शुगर और एल्बुमिन की जांच किए बिना ही फर्जी रिपोर्ट थमा दी गई। परिजनों द्वारा बनाए गए एक वीडियो में भी साफ देखा गया कि यूरिन सैंपल स्टैंड पर ही रखे रह गए और महज कुछ ही मिनटों में रिपोर्ट तैयार कर सौंप दी गई। जब परिजनों ने वीडियो बनाना शुरू किया, तो लैब टेक्नीशियनों ने आनन-फानन में यूरिन सैंपलों में स्ट्रिप्स डालना शुरू कर दिया। यह मामला स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था।
⚠️ जांच में पाई गईं गंभीर लापरवाहियां
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा की गई जांच में निम्नलिखित गंभीर अनियमितताएं पाई गईं:
- बिना जांच रिपोर्ट जारी करना: शिविर में आईं कई गर्भवती महिलाओं की यूरिन, ब्लड शुगर और एल्बुमिन की जांच असल में की ही नहीं गई थी।
- शासकीय सामग्री का दुरुपयोग: सरकारी सप्लाई की यूरिन एल्बुमिन स्ट्रिप्स का सही उपयोग नहीं किया गया, जिससे हितग्राहियों को शुगर और एल्बुमिन की सही स्थिति का पता नहीं चल सका।
स्वास्थ्य पर संभावित खतरा: अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की लापरवाही से भविष्य में गर्भवती महिलाओं में ‘जेस्टेशनल डायबिटीज’ (Gestational Diabetes), हाइपरटेंशन, प्री-एक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia) और एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर बीमारियों का सही समय पर उपचार नहीं हो पाता। इससे गर्भस्थ शिशु और माता दोनों की जान को खतरा हो सकता है, यहाँ तक कि दोनों की मृत्यु भी संभावित है।
🔨 क्या हुई शासकीय कार्यवाही?
इस कृत्य को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता मानते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं:
श्रेणी की गई कार्यवाही आरोपी लैब टेक्नीशियन श्री अंकित शर्मा और सुश्री लीना सिंघाड़िया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। लागू नियम यह कार्यवाही मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(1) के अंतर्गत की गई है। संबंधित अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी को कारण बताओ सूचना पत्र (शो-कॉज नोटिस) जारी किया गया है। निलंबन अवधि का मुख्यालय: निलंबन के दौरान दोनों लैब टेक्नीशियनों का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिंगोली (जिला नीमच) निर्धारित किया गया है। इस अवधि में नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।









