उपजाऊ खेतों पर सोलर प्लांट: सोच-समझकर लें निर्णय 30 साल बाद अपनी जमीन अपने बच्चों के द्वारा बाहरी कंपनियों से वापस लेना बड़ा जटिल होगा

By starhindinewslive@gmail.com

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देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही अनेक किसान अपनी उपजाऊ कृषि भूमि 25–30 वर्षों के लिए सोलर कंपनियों को लीज़ पर दे रहे हैं। इससे उन्हें नियमित और निश्चित आय मिलती है, जो कृषि की अनिश्चित आय की तुलना में आकर्षक प्रतीत होती है। लेकिन इस निर्णय के दूरगामी प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।

यदि बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि खेती से बाहर हो गई, तो भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक खेती नहीं होने से भूमि की उत्पादकता पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही खेती से जुड़े मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

सोलर ऊर्जा का विरोध नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए आवश्यक है। किंतु इसकी स्थापना के लिए प्राथमिकता बंजर, अनुपजाऊ या कम उत्पादक भूमि को दी जानी चाहिए। जहाँ उपजाऊ भूमि का उपयोग

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अजीमुल्ला खान, नीमच जिले के रामपुरा तहसील के छोटी खंडार गाँव के मूल निवासी हैं। 15 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ दे रहे अजीमुल्ला खान स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता देते हैं। स्थायी पता: छोटी खंडार, रामपुरा, जिला - नीमच (मध्य प्रदेश) पत्रकारिता अनुभव: 15 वर्ष ब्लड ग्रुप: A+ (ए पॉजिटिव) संपर्क: 9179319989

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